कैट ने जीएसटी में प्रस्तावित कर स्लैब के अंतर्गत वस्तुओं के पुनर्वर्गीकरण की मांग की छोटे व्यापारियों के समर्थन हेतु कार्बोनेटेड पेय को 18% जीएसटी स्लैब में रखा जाए – कैट ने वित्त मंत्री से की अपील
कन्फ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जीएसटी के नेक्स्ट जनरेशन सुधारों के आह्वान का स्वागत करते हुए इसे जीएसटी को वास्तविक अर्थों में कंज्यूमर बोनांजा बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को भेजे गए एक पत्र में कैट ने कहा कि प्रधानमंत्री का जीएसटी को सरल बनाने और कर स्लैब को तर्कसंगत करने का दृष्टिकोण देश के आंतरिक व्यापार तंत्र को मजबूत करने का सुनहरा अवसर है, जिससे विशेष रूप से छोटे खुदरा व्यापारी, किराना स्टोर, फेरीवाले और पान की दुकान चलाने वाले लोग लाभान्वित होंगे, जो देश के लास्ट माइल रिटेल नेटवर्क की रीढ़ हैं।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी. भारतीया ने अपने पत्र में कहा कि जब जीएसटी कर प्रणाली का पुनर्गठन किया जा रहा है, तो एक ओर कर स्लैब को पुनर्परिभाषित करना आवश्यक है और दूसरी ओर बहु-आयामी अनुपालनों (compliances) के बोझ को कम करना इन सुधारों का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।
हंसा रिसर्च के साथ कराए गए कैट-अध्ययन का उल्लेख करते हुए श्री भारतीया ने बताया कि केवल पेय पदार्थ ही छोटे किराना स्टोरों की बिक्री मात्रा का लगभग 30% हिस्सा रखते हैं। किंतु वर्तमान में कार्बोनेटेड पेयों पर उच्च कर दर ने छोटे व्यापारियों की तरलता को बाधित किया है और उनकी आय की क्षमता को कम कर दिया है, जबकि ये उत्पाद उनकी सबसे अधिक बिक्री वाले सामानों में से हैं।
“पेय पदार्थ जन-उपभोग की वस्तुएं हैं, जिन्हें मुख्य रूप से छोटे व्यापारी बेचते हैं और वे बहुत ही कम मार्जिन पर कार्य करते हैं। इस श्रेणी पर जीएसटी को तर्कसंगत करने से उनके परिचालन दबाव में कमी आएगी, आय में सुधार होगा और इस क्षेत्र में औपचारिककरण को बढ़ावा मिलेगा, जो आज भी 80% से अधिक असंगठित है,” श्री भारतीया ने कहा।
कैट ने उल्लेख किया कि वैश्विक स्तर पर पेय पदार्थों पर औसत कर दर 16–18% के बीच है और कार्बोनेटेड पेयों को 18% जीएसटी स्लैब में रखने से भारत अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुरूप होगा तथा घरेलू औपचारिककरण को बढ़ावा मिलेगा। वित्तीय विश्लेषण यह दर्शाता है कि ऐसा कदम सामाजिक रूप से न्यायसंगत होगा और मध्यम अवधि में सरकार के लिए राजस्व-सकारात्मक सिद्ध होगा।
व्यापारिक समुदाय की ओर से कैट ने आग्रह किया कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित जीएसटी सुधारों के अंतर्गत कार्बोनेटेड पेयों को 18% स्लैब में पुनर्वर्गीकृत किया जाए। यह कदम छोटे व्यापारियों को वास्तविक राहत देगा, वैल्यू चेन में रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देगा और विस्तारित कर आधार से सरकार के राजस्व में वृद्धि करेगा।
“प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा ने व्यापारियों में अपार आशा का संचार किया है। हमें दृढ़ विश्वास है कि पेय पदार्थ जैसे रोज़मर्रा के उपयोग वाले प्रमुख उपभोग श्रेणियों में जीएसटी का तर्कसंगतिकरण छोटे व्यवसायों, उपभोक्ताओं और समग्र अर्थव्यवस्था के लिए परिवर्तनकारी कदम सिद्ध होगा,” श्री भारतीया ने जोड़ा।
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