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नए ई-कॉमर्स नियम अधिक पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे: खंडेलवाल कैट ने ऐतिहासिक सुधारों का स्वागत किया, प्रिडेटरी प्राइसिंग, एफडीआई उल्लंघनों और पक्षपातपूर्ण व्यवहार पर सख्त कार्रवाई की मांग की

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना का स्वागत करते हुए इसे भारत के डिजिटल व्यापार तंत्र को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायसंगत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरगामी कदम बताया है।

1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले इन नियमों में सर्च रैंकिंग में पारदर्शिता, प्रायोजित (स्पॉन्सर्ड) लिस्टिंग का स्पष्ट खुलासा, छूट की वास्तविक जानकारी का प्रदर्शन, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन से एकीकरण, शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत बनाना तथा उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले ‘डार्क पैटर्न्स’ पर रोक जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत लगातार उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई क्षेत्र को डिजिटल अर्थव्यवस्था में समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि कैट लंबे समय से अत्यधिक छूट (डीप डिस्काउंटिंग), अपारदर्शी एल्गोरिद्म, भ्रामक प्रचार, सर्च परिणामों में हेरफेर तथा चुनिंदा विक्रेताओं को प्राथमिकता दिए जाने जैसे मुद्दों को उठाता रहा है। नए नियम इन चिंताओं का समाधान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन व्यापार के बीच समान प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार करेंगे।

श्री खंडेलवाल ने विशेष रूप से स्पॉन्सर्ड लिस्टिंग के अनिवार्य खुलासे, सर्च परिणामों में हेरफेर पर रोक तथा किसी भी छूट के विज्ञापन के साथ पिछले 30 दिनों के न्यूनतम मूल्य को प्रदर्शित करने की अनिवार्यता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे उपभोक्ताओं का विश्वास बढ़ेगा और भ्रामक मूल्य निर्धारण की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने कहा कि ये सुधार प्रधानमंत्री मोदी के “वोकल फॉर लोकल”, “आत्मनिर्भर भारत” और “लोकल टू ग्लोबल” के विज़न के अनुरूप हैं तथा देश के छोटे व्यापारियों, उद्यमियों और एमएसएमई को डिजिटल बाज़ार में अधिक अवसर प्रदान करेंगे।

नियमों का स्वागत करते हुए कैट ने सरकार से अगले चरण के सुधारों के तहत प्रिडेटरी प्राइसिंग और लॉस-फंडिंग प्रथाओं पर सख्त कार्रवाई, ई-कॉमर्स में एफडीआई नियमों का कठोर अनुपालन, सर्च रैंकिंग एवं उत्पाद अनुशंसा एल्गोरिद्म में अधिक पारदर्शिता, चुनिंदा विक्रेताओं एवं संबद्ध संस्थाओं को दी जाने वाली प्राथमिकता की समाप्ति, प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाले एक्सक्लूसिव लॉन्च पर नियंत्रण, उपभोक्ता एवं विक्रेता डेटा की सुरक्षा, एमएसएमई विक्रेताओं को समयबद्ध भुगतान तथा विक्रेताओं पर लगाए जाने वाले सभी शुल्कों, कमीशनों और प्रभारों के पूर्ण खुलासे की मांग की।

श्री खंडेलवाल ने कहा कि डिजिटल वाणिज्य की सफलता केवल बड़े प्लेटफॉर्म्स की वृद्धि से नहीं मापी जानी चाहिए, बल्कि इस बात से आंकी जानी चाहिए कि वह देश के करोड़ों व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को कितना सशक्त बनाता है।

कैट ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी तथा उपभोक्ता मामले विभाग का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने डिजिटल व्यापार क्षेत्र की बदलती चुनौतियों एवं विभिन्न हितधारकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं।

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