प्रधानमंत्री मोदी के वैश्विक निर्यात विस्तार के विज़न को बड़ा बल — प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए मजबूत सुरक्षा उपाय आवश्यक
विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को भारत में निर्मित अथवा उत्पादित वस्तुओं के निर्यात हेतु इन्वेंट्री (स्टॉक) रखने की अनुमति देने का निर्णय एक स्वागतयोग्य और दूरदर्शी कदम है। यह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के भारत की वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ाने, निर्यात तंत्र को सशक्त बनाने, “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” अभियान को गति देने तथा भारतीय निर्माताओं, एमएसएमई, कारीगरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर सृजित करने के विज़न के अनुरूप है। यह बात कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कही।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि निर्यात को बढ़ावा देने के उद्देश्य का पूर्ण समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि इस प्रावधान को उसके मूल उद्देश्य और भावना के अनुरूप लागू किया जाए तथा इसका दुरुपयोग घरेलू बी2सी (B2C) ई-कॉमर्स व्यापार के लिए पिछले दरवाजे के रूप में न हो, क्योंकि वर्तमान एफडीआई नीति के अंतर्गत विदेशी कंपनियों को घरेलू बी2सी ई-कॉमर्स व्यापार की अनुमति नहीं है।
पारदर्शिता, जवाबदेही और नीति के प्रभावी अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए श्री खंडेलवाल ने निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
1. केवल DPIIT की पूर्व स्वीकृति के आधार पर अनुमति दी जाए
निर्यात के उद्देश्य से इन्वेंट्री रखने की अनुमति किसी भी विदेशी कंपनी को ऑटोमैटिक रूट के तहत नहीं दी जानी चाहिए। इसके बजाय उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा कंपनी की व्यवसाय योजना की विस्तृत जांच करने तथा यह बाध्यकारी आश्वासन प्राप्त करने के बाद ही अनुमति दी जानी चाहिए कि इन्वेंट्री का उपयोग केवल निर्यात गतिविधियों के लिए होगा और घरेलू बी2सी व्यापार के लिए नहीं।
2. निर्यात हेतु पृथक एवं बॉन्डेड गोदाम की व्यवस्था
विदेशी कंपनियों के स्वामित्व वाली निर्यात इन्वेंट्री को केवल भौतिक रूप से अलग और कस्टम-बॉन्डेड गोदामों में रखा जाना चाहिए, ताकि उसकी पूर्ण ट्रैकिंग सुनिश्चित हो सके और घरेलू बाजार में किसी भी प्रकार के विचलन को रोका जा सके।
3. त्रैमासिक भौतिक सत्यापन एवं ऑडिट
डीपीआईआईटी और डीजीएफटी के अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा प्रत्येक तिमाही में निरीक्षण और ऑडिट किया जाना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन्वेंट्री का उपयोग केवल निर्यात के लिए हो रहा है और उसका कोई हिस्सा घरेलू बी2सी व्यापार में नहीं जा रहा है।
4. अनुपालन रिपोर्ट का सार्वजनिक प्रकटीकरण
पारदर्शिता और जनविश्वास को बढ़ाने के लिए ऑडिट रिपोर्ट प्रत्येक तिमाही में डीपीआईआईटी तथा संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित की जानी चाहिए।
5. सख्त प्रवर्तन एवं अनुमति की तत्काल वापसी
यदि कोई कंपनी ऑडिट कराने से इंकार करती है, आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराती है अथवा घरेलू बी2सी बिक्री के लिए इन्वेंट्री के दुरुपयोग का कोई प्रमाण मिलता है, तो उसकी अनुमति तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जानी चाहिए तथा एफडीआई नीति और अन्य लागू कानूनों के तहत आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
श्री खंडेलवाल ने कहा कि ये उपाय इस नीति के वास्तविक उद्देश्य — भारत के निर्यात को गति देने — को प्राप्त करने में सहायक होंगे, साथ ही देश की एफडीआई नीति की पवित्रता बनाए रखेंगे और घरेलू व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी सुनिश्चित करेंगे।
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