कैट ने अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर सीसीआई की जाँच रिपोर्ट का स्वागत किया कैट ने भारत के कानूनों का उल्लंघन करने के लिए ई-कॉम दिग्गजों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर जांच रिपोर्ट का स्वागत करते हुए, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने विदेशी ई-कॉमर्स दिग्गजों पर तीखा हमला करते हुए भारतीय संप्रभु कानूनों के उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एमेरिटस और चांदनी चौक के सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि वह जल्द ही इस मुद्दे को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल के सामने उठाएंगे और ई-कॉमर्स नियमों और ई-कॉमर्स नीति को लागू करने का आग्रह करेंगे ताकि ई-कॉमर्स कंपनियां कानून का उल्लंघन करने की हिम्मत न कर सकें। उन्होंने कहा कि यह कदम श्री गोयल द्वारा कुछ दिन पहले दिए गए बयान के बाद उठाया जाएगा, जिसमें उन्होंने ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा अपनाई जा रही प्रथाओं की कड़ी निंदा की थी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शासन के तहत, जो भी कानून का उल्लंघन करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बीसी भरतिया ने इस मुद्दे की व्याख्या करते हुए कहा कि कई वर्षों से ये विदेशी वित्तपोषित ई-कॉमर्स दिग्गज शिकारी रणनीतियों और प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यावसायिक प्रथाओं को अपनाकर भारत के खुदरा बाजार को नुकसान पहुंचा रहे हैं और नष्ट कर रहे हैं। दिल्ली व्यापार महासंघ, जो कैट का एक सहयोगी संगठन है, ने 2020 में सीसीआई में इन कंपनियों की व्यावसायिक प्रथाओं की गहन जांच की मांग करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी और आज सीसीआई की रिपोर्ट के बाद भारतीय व्यापारियों की लॉबी को न्याय मिला है, जिसने स्पष्ट रूप से अमेज़न और फ्लिपकार्ट को कदाचार का दोषी पाया है। उन्होंने आगे कहा कि हम अब इस मामले को भारतीय सरकार तक पहुंचाएंगे और यदि आवश्यक हुआ तो कानूनी रास्ता अपनाएंगे और इन कानून उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि कैट कठोर कार्रवाई की मांग करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा ताकि भविष्य में कोई भी कंपनी भारतीय कानूनों को दरकिनार करने की हिम्मत न कर सके।
श्री भरतिया ने कहा कि मीडिया में आई रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने अमेज़न और फ्लिपकार्ट को कई भारतीय प्रतिस्पर्धा कानूनों के उल्लंघन पर फटकार लगाई है, मुख्य रूप से गहरे छूट प्रथाओं, विशेष विक्रेता व्यवस्था, विशेष उत्पाद लॉन्च, विशेष विक्रेता समझौतों, शिकारी मूल्य निर्धारण जैसी प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं पर, जो प्रकृति में हानिकारक हैं और भारत के खुदरा पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सीसीआई की जांच ने यह भी उजागर किया है कि ये कंपनियां विभिन्न श्रेणियों में उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला में अनुचित प्रथाओं में लिप्त हैं और केवल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स तक ही सीमित नहीं हैं।
दोनों व्यापारी नेताओं ने कहा कि भारत को एक संतुलित खुदरा पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता है, जिसमें मुख्यधारा के हर खुदरा विक्रेताओं के साथ ई-कॉमर्स खिलाड़ी सह-अस्तित्व में रह सकें ताकि हर किसी को भारत के बढ़ते खुदरा बाजार में हिस्सेदारी मिल सके। वर्तमान में, मोटी जेबों वाली विदेशी कंपनियों की इन प्रतिस्पर्धा-विरोधी प्रथाओं के कारण, 90 मिलियन भारतीय खुदरा विक्रेता गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
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