राष्ट्रीय महिला उद्यमी सम्मेलन ने महिला आरक्षण विधेयक की हार की कड़ी निंदा की
काले झंडे लहराते हुए और हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए, देशभर से आई 300 से अधिक महिला उद्यमियों ने कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय महिला उद्यमी सम्मेलन में एकत्र होकर संसद में कल महिला आरक्षण विधेयक को हराने पर कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों के प्रति गहरा आक्रोश, पीड़ा और तीव्र नाराजगी व्यक्त की।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की उपस्थिति में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में महिला उद्यमियों की अभूतपूर्व एकजुटता और दृढ़ संकल्प देखने को मिला। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश की महिलाओं की आकांक्षाओं के साथ “ऐतिहासिक विश्वासघात” करार दिया।
सम्मेलन में सर्वसम्मति से एक कड़े शब्दों में प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें विपक्ष द्वारा महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में लंबे समय से लंबित 33 प्रतिशत आरक्षण से वंचित करने के इस कदम को एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण प्रयास बताया गया। प्रतिभागियों ने स्पष्ट कहा कि यह कदम महिलाओं के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में उनकी समान भागीदारी के प्रति घोर उदासीनता और पिछड़ी सोच को दर्शाता है।
सभा को संबोधित करते हुए सांसद एवं कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “कांग्रेस और उसके सहयोगी आज जिस ‘जीत’ का जश्न मना रहे हैं, वह कोई राजनीतिक विजय नहीं, बल्कि देश की महिलाओं के अधिकारों और उनकी आकांक्षाओं पर किया गया एक शर्मनाक और प्रतिगामी प्रहार है। यह तथाकथित ‘जीत’ हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक काला धब्बा है और महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति इन दलों की खोखली प्रतिबद्धता को उजागर करती है।”
उन्होंने आगे कहा, “महिला आरक्षण विधेयक को पराजित कर विपक्ष ने देश की आधी आबादी के साथ जानबूझकर अन्याय किया है। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं, बल्कि हर उस महिला का अपमान है जो सम्मान, समानता और अपने अधिकारपूर्ण प्रतिनिधित्व के लिए संघर्ष कर रही है। देश की महिलाएं इस विश्वासघात को न तो भूलेंगी और न ही माफ करेंगी।”
सम्मेलन में उपस्थित महिला उद्यमियों ने कहा कि इस कदम के दूरगामी दुष्परिणाम होंगे, जो केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों को भी प्रभावित करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी से वंचित करना लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करता है।
सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे पर देशभर में एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें महिला उद्यमियों और व्यापारी वर्ग को संगठित कर महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में जनजागरण किया जाएगा और इस ऐतिहासिक अवसर पर महिलाओं के साथ खड़े न होने वालों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
सम्मेलन का माहौल एक स्पष्ट संदेश दे रहा था कि देश की महिलाएं एकजुट, सजग और दृढ़ हैं, और उनके अधिकारों को कमजोर करने का कोई भी प्रयास सख्त और निर्णायक प्रतिरोध का सामना करेगा।
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