राष्ट्रऋषि दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की 105वीं जयंती पर स्वदेशी संकल्प के साथ श्रद्धांजलि कार्यक्रम आज दिल्ली में हुआ
आज राष्ट्रऋषि श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी जी की 105वीं जयंती के अवसर पर एक गरिमामय समारोह में उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। ठेंगड़ी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके जीवन और विचारों को नमन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने “स्वदेशी अपनाओ – आत्मनिर्भर भारत बनाओ” का संकल्प भी लिया।यह कार्यक्रम कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) तथा भामाशाह फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में चाँदनी चौक से सांसद श्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि राष्ट्रऋषि ठेंगड़ी जी न केवल भारतीय मजदूर संघ और भारतीय किसान संघ के संस्थापक थे, बल्कि वे भारतीय अर्थचिंतन के प्रखर मनीषी और स्वदेशी दर्शन के प्रणेता थे। उनका सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रीयता, श्रम, स्वावलंबन और आत्मगौरव के अद्भुत संगम का प्रतीक रहा।
उन्होंने कहा की राष्ट्रऋषि ठेंगड़ी जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि भारत की आर्थिक आज़ादी का मार्ग केवल स्वदेशी से होकर ही जाता है। आज जब भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है, तब ठेंगड़ी जी के विचार और भी प्रासंगिक हो गए हैं। उनका चिंतन हर व्यापारी, हर श्रमिक और हर किसान के लिए प्रेरणास्त्रोत है।”
श्री खंडेलवाल ने आगे कहा कि स्वदेशी केवल एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा है और हमें ठेंगड़ी जी के बताए मार्ग पर चलते हुए स्वदेशी अर्थव्यवस्था को सशक्त करना होगा।
समारोह के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने यह संकल्प दोहराया कि वे अपने जीवन और व्यवसाय में भारतीय उत्पादों और भारतीय मूल्यों को सर्वोपरि रखेंगे तथा राष्ट्रऋषि ठेंगड़ी जी के विचारों को व्यवहार में उतारने का निरंतर प्रयास करेंगे।
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